यशपाल शर्मा / लुधियाना जहां एक तरफ लुधियाना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट में पूर्व चेयरमैन रमन बालासुब्रमण्यम के कार्यकाल दौरान हुए करोड़ों रुपए के घोटाले में ट्रस्ट ऑफिस का कुछ स्टाफ जेल में बंद है तो कुछ स्टाफ सस्पेंड होने की मार झेल रहा है तो वहीं इसके बावजूद इंप्रूवमेंट ट्रस्ट में तैनात आफिसर व मुलाजिम घोटाले को अंजाम देने से बाज नहीं आ रहे। इसी का नतीजा है कि लुधियाना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट में एक बार फिर से लोकल गवर्नमेंट की चीफ विजिलेंस ऑफिसर से आया स्टाफ आज दबिश देता दिखा। विजिलेंस की ओर से राजगुरूनगर के 201 सी नंबर प्लॉट से संबंधित रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिया है और इसके साथ साथ यह टीम 8 व 10 सी शहीद भगत सिंह के 40 गज के प्लॉट संबंधी रिकॉर्ड जुटाने में लगी रही। बताया जाता है कि इंप्रूवमेंट ट्रस्ट घोटाले में आरोपी क्लर्क गगनदीप सिंह की ओर से खरीद किया गया है। बताया जाता है कि इस प्लाट का आलाटी जिंदा हैं या नहीं इसकी जांच संभव है। ये प्लाट आगे ट्रांसफर या रजिस्ट्री कैसे किया गया है, इस पर जांच की जानी हैं। हालांकि इस मामले में आने वाले दिनों में इंजीनियरिंग विंग के अफसरों व मुलाजिमों की भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जिनकी ओर से मौके पर पहुंचने के बावजूद गलत रिपोर्ट कर इस पूरे घोटाले को अंजाम देने की अहम भूमिका निभाई गई। बीते दिनों इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की सेल ब्रांच में तैनात विशाल नाम के क्लर्क ने बिना सीनियर असिस्टेंट व सुपरिटेंडेंट को बाईपास करते हुए सीधे सीधे फाइल नंबर 201 सी ईओ जतिंदर सिंह से क्लियर करवा ली गई। जबकि इस फाइल पर करीब 30 से 35 लाख रुपए का नॉन कंस्ट्रक्शन बकाया खड़ा था, लेकिन इस स्कीम को देख रहे क्लर्क विशाल की ओर से पहले इंजीनियरिंग ब्रांच के स्टाफ से मिल मौके पर प्लाट पर नियमों के तहत कंस्ट्रक्शन ना होने की गोलमाल रिपोर्ट करवा ली, जबकि मौके पर यह प्लॉट पूरी तरह से खाली है और इसकी चारदीवारी की गई है और इसके एवज में ₹3 लाख का एक ड्राफ्ट प्लॉट मालिक से ले लिया गया। इस पूरे घटनाक्रम में सीधे-सीधे इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को करीब 30 से 35 लाख रुपए के गबन किए जाने की तैयारी थी। बताया जाता है कि इस पूरे मामले में सेल ब्रांच और इंजीनियरिंग ब्रांच की ओर से मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया जा रहा था। बताया जाता है कि अब यह पूरा मामला लोकल गवर्नमेंट सेक्रेटरी के साथ-साथ लोकल गवर्नमेंट मिनिस्टर इंद्रबीर सिंह निज्जर के भी ध्यान में आ चुका है और इसी का नतीजा है कि आज चंडीगढ़ से सीवीओ की टीम इस प्लॉट से संबंधित रिकॉर्ड खंगालती दिखाई दी। - इस तरह से प्लॉट नंबर 201 सी का घोटाला आया सामने करीब 1 सप्ताह पहले लुधियाना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के क्लर्क विशाल की ओर से एक फाइल नंबर 201 से राजगुरूनगर को सीनियर असिस्टेंट व सुपरीटेंडेंट से हस्ताक्षर करवाए बिना सीधे-सीधे ईओ को विश्वास में ले क्लियर करवा ली, लेकिन जब ऑफिस के एक मुलाजिम ने इस फाइल में गड़बड़ होने का अंदेशा जताया तो जांच के बाद मालूम हुआ कि लाखों के नॉन कंस्ट्रक्शन फीस का गबन करने को ये पूरा फंडा किया गया था। जिसके बाद ईओ जतिंदर सिंह ने यह मामला लुधियाना इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन तरसेम सिंह भिंडर के सामने लाया गया और तरसेम सिंह भिंडर की ओर से इसके बाद जिम्मेदार स्टाफ पर कार्रवाई को एक डीओ लोकल बॉडी मिनिस्टर इंद्रबीर सिंह निज्जर को भेजा गया जिसके बाद अब इस मामले में अगला बड़ा एक्शन होता दिखाई दे रहा है। माना जा रहा है कि इस पूरे प्रकरण में जिम्मेदार क्लर्क को सस्पेंड या लुधियाना से ट्रांसफर तक किया जा सकता है। इंप्रूवमेंट ट्रस्ट में फिर से प्रॉपर्टी डीलर एक्टिव बात करें इंप्रूवमेंट ट्रस्ट लुधियाना की तो यहां पर होने वाले बडे घोटाले की नींव हमेशा से प्रॉपर्टी डीलर रखते आए हैं और चेयरमैन तरसेम सिंह भिंडर के कार्यकाल में भी डिफाल्टर प्रॉपर्टी डीलरों ने ट्रस्ट आफिस को अपने ग्रिप में ले लिया है। ये डीलर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट चेयरमैन को अपना बेहद नजदीकी बताते हैं और इतना ही नहीं कुछ अकाली नेता भी ट्रस्ट के विवादित प्लाटों व उलझे हुए केसों की जानकारी ट्रस्ट की स्कीमों में बैठे डीलरों से जुटा रहे हैं। हालांकि चेयरमैन तरसेम सिंह भिंडर का अब तक की कारगुजारी बेहद साफ व पारदर्शी रही है। ऐसे में ये प्रॉपर्टी डीलर व अकाली दल से जुडे़ नेता कहीं न कहीं मौजूदा चेयरमैन का अक्श खराब करने की कोशिश भी कर सकते हैं। बताया जाता है कि कुछ एक डीलर खुद को चेयरमैन का नजदीकी बता सेल ब्रांच व इंजीनियरिंग ब्रांच के अफसरों का दबाव में लाने की कोशिश में हैं। ये डीलर ट्रस्ट में करीब पांच साल पहले अच्छा खासा एक्टिव थे और मोटी गड़बड़ी करवाने में भी इनका नाम उछलता रहा है।
Despite Vigilance Fir Improvement Trust Staff Is Not Deterred From Scam Cvo Team Reached Office