इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन और पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू के नजदीकी कहे जाने वाले रमण बाला सुब्रामनियम की राजगुरु नगर के पास स्थित प्राइवेट कालोनी में बनी कोठी में इंफोर्समेंट डायरेक्टोरेट की छापामारी ने आज सब को हैरानी में डाल दिया। अधिकतर लोगों की जुबां पर यही था कि रमण बाला सुब्रामनियम का फूड सप्लाई डिपार्टमेंट घोटाले में कोई लिंक नहीं, तो फिर ये रैड उनकी कोठी पर क्यों हुई है। उधर ईडी ने अपनी पड़ताल में सुबह से उनके घर पर ऐसा माहौल बनाया हुआ था कि जैसे उसके घर पर कोई छापमारी हुई ही नहीं, लेकिन उनके घर के पास खड़ी अमृतसर व जालंधर नंबर की इंनोवा गाड़ियों से ये साफ हो पाया कि ईडी के अधिकारी कोठी के अंदर ही है और किसी को भी घर से बाहर व अंदर आने की इजाजत नहीं थी। असल में बालासुब्रामनियम के घर पर चल रही छापमारी में फूड सप्लाई नहीं, ब्लकि इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की सरकारी प्रॉपटियों में हुई करोड़ृों की धांधली को लेकर ईडी ने दबिश दी है। बताया जाता है कि इस छापमारी के राड़ार पर ट्रस्ट के दो एक्सईन स्तर के अफसर भी हैं। ये दोनों अफसर पहले से इंप्रूवमेंट ट्रस्ट घोटाले में विजिलेंस की एफआईआर में नामजद हैं। ये दोनों एक्सईन बूटा राम व जगदेव सिंह फिलहाल हाईकोर्ट से जमानत पर बाहर हैं। बताया जाता है कि ये दोनों ही अफसर ट्रस्ट के माडल हाउस में बनी कोठी में रहते हैं और सुबह ईडी की छापामारी के बाद से इनके मोबाइल बंद थे। जबकि इस कोठी में तैनात सेवादार व इनको मिला सरकारी ड्राइवर का फोन भी स्वीच ऑफ रहा। फिलहाल इस बात की कोई पुष्टि नहीं हो पाई, ये अफसर ईडी की पकड़ में हैं या उनके आने के बाद अंडर ग्राउंड हो गए हैं। बताया जाता है कि ईडी की टीम ने पूर्व ईओ कुलजीत कौर के घर भी गई और उससे भी पूछताछ की और इसके बाद शाम में रमण बाला सुब्रामनियम के पीए संदीप शर्मा के हैबोवाल निवास पर ये टीम करीब डेढ़ घंटा पड़ताल करती देखी गई। अब लाेगों के दिलों में ये सवाल आ रहा है कि रमण बाला सुब्रामनियम कानूनी ढंग से विजिलेंस जांच में तो कहीं न कहीं अपना बचाव करने में कामयाब रहे, लेकिन अब ईडी के इस शिकंजे से कैसे बच पाएंगे।
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प्लाॅटों की ई आक्शन व एलडीपी अलॉटमेंट में जांच के घेरे में पूर्व चेयरमैन
बात करें इंप्रूवमेंट ट्रस्ट में रमण बाला सुब्रामनियम के बतौर चेयरमैन रहते कईं तरह के घोटाले उनके कार्यकाल के साथ आ जुडे़ हैं। जिनकी पड़ताल पहले लुधियाना विजिलेंस ब्यूरो का इक्नोमिक सैल कर रहा था। ट्रस्ट में विजिलेंस ने पहले रिश्वत का मामला दर्ज किया था, जिसमें ट्रस्ट की ईओ कुलजीत कौर की गिरफतारी की गई थी। जिसके बाद विजिलेंस ने ईओ कुलजीत कौर के बयानों पर एक ओर मामला दर्ज कर रमण बाला सुब्रामनियम को कईं तरह के घोटाले के बीच ला खड़ा किया। बाला सुब्रामनियम के कार्यकाल में ई आक्शन के जरिए करोड़ों रुपए की प्रॉपर्टी बेची गई। जिसमें कई तरह के रिहायशी प्लॉट, एससीओ व बूथ बेचे गए । इसके अलावा कईं जगहों पर स्कूल साइट या रेजिडेंशियल साइट के ले आउट में बदलाव कर उसमें प्लॉट काट दिए गए। ऐसा एक मामला शहीद भगत सिंह का है तो दूसरा मामला ऋषि नगर Y ब्लॉक का है। ऋषि नगर की ये साइट करीब पौने तीन एकड़ की है और इसका फ्रंट हिस्सा कार्मशियल तौर पर बेचा जा सकता था, जिससे करोड़ों रुपए की आमदन हो सकती थी। लेकिन रमण बाला सुब्रामनियम पर आरोप है कि उन्होंने अपने नजदीकियों को फायदा पहुंचाने के लिए इस जमीन पर विवादित एलडीपी प्लॉट के तौर पर 500 -500 गज के प्लॉट अलॉट कर दिए या उनके लिए रिजर्व रख दिए। बताया जाता है कि सरकारी जमीन को टैक्नीकल ढंग से खुर्दबुर्द करने के कुछ अन्य आरोप भी रमण बाला सुब्रामनियम के कार्यकाल में निकलकर सामने आए हैं। हालांकि इससे पहले विजिलेंस की एफआईआर के खिलाफ रमण बाला सुब्रामनियम हाईकोर्ट से बड़ी राहत पाने में सफल रहे थे और इसमें भी विजिलेंस ईओ विंग का बड़ा फेलियर रहा। इसके बाद भी विजिलेंस रमण बाला सुब्रामनियम को आधा दर्जन से अधिक बार अपने आफिस बुला कईं तरह की प्रॉपर्टी खरीद व उनकी ट्रांसजंक्शन की पूछताछ कर चुकी है, लेकिन अभी तक किसी तरह का नतीजा हासिल नहीं हुआ है। बताया जाता है कि ईडी ने इंप्रूवमेंट ट्रस्ट संबंधी एफआईआर के बाद ही विजिलेंस से पूरा रिकार्ड मंगवाना शुरु कर दिया था और अब उसी एफआईआर के तहत आरोपियों तक पहुंच रही है।
Raman-Bala-Subramaniam-Survived-Vigilance-Action-Now-What-Will-Happen-To-Him-In-Ed-