लुधियाना। पंजाब गवर्नर बनवारी लाल पुरोहित के 50 हजार करोड़ के कर्ज का हिसाब मांगने के लेटर पर आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार घिरती दिख रही है। अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने AAP के 14 वादे याद करवाते हुए जवाब मांगा है। इतना ही नहीं, तंज भी कसा है कि लोगों के पैसों से दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल के बिल भरे हैं। सुखबीर बादल ने टवीट करते हुए कहा - पंजाब मांग रहा जवाब। भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य पर 50000 करोड़ रुपए का कर्ज बढ़ा दिया है। ये कर्ज किस पर खर्च किया?।
▪️फसल मुआवजा - भुगतान नहीं किया गया
▪️बाढ़ मुआवजा- भुगतान नहीं किया गया
▪️महिलाओं को 1000 रुपए/माह - भुगतान नहीं
▪️बुजुर्गों को संशोधित पेंशन- भुगतान नहीं किया गया
▪️नवविवाहित लड़कियों को शगुन - भुगतान नहीं
▪️बेरोजगारी भत्ता - भुगतान नहीं हुआ
▪️भगत पूरन सिंह स्वास्थ्य बीमा योजना - बंद
▪️निःशुल्क तीर्थ यात्रा योजना - बंद
▪️छात्राओं को निःशुल्क साइकिल - नहीं दी गई
▪️जरूरतमंद परिवारों को निःशुल्क बर्तन- नहीं दिए गए
▪️आटा-दाल योजना - कार्ड हटा दिए गए
▪️सेवा केंद्र - बंद
▪️सुविधा केंद्र - बंद ▪️नई सड़कें/फ्लाईओवर (बुनियादी ढांचा) : निर्माण नहीं हुआ
तो, क्या लोगों का पैसा केवल आत्म-प्रचार और दिल्ली के मालिक अरविंद केजरीवाल के हवाई यात्रा और होटल बिलों का भुगतान करने पर खर्च किया गया था?।
क्यों पैदा हुआ विवाद
पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने बीते दिन पंजाब सरकार से 50 हजार करोड़ रुपये के कर्ज का हिसाब मांग लिया। गवर्नर के खत के अनुसार, ये कर्जा आम आदमी पार्टी (AAP) की मौजूदा सरकार ने अब तक के अपने कार्यकाल के दौरान लिया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गुरुवार को राज्यपाल को पत्र लिखा था। जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार से रूरल डेवलपमेंट फंड (RDF) के बकाया 5637 करोड़ रुपए जारी कराने की खातिर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के समक्ष पंजाब का यह मुद्दा उठाने की मांग की थी।
गवर्नर के खत के आंकड़ों से विपक्ष ने घेरा
गवर्नर पुरोहित ने अपने खत में लिखा- पता चला कि आपके शासनकाल में पंजाब पर लगभग 50000 करोड़ का कर्ज बढ़ गया है। इस बड़ी राशि के उपयोग का विवरण दिया जाए ताकि प्रधानमंत्री को आश्वस्त कर सकूं कि धन का उचित उपयोग किया गया है।
Aap-Government-Surrounded-By-Punjab-Governors-Letter-Sukhbir-Badal-Reminded-Of-14-Promises-Said-Kejriwals-Bills-Will-Be-Paid-With-Peoples-Money