यशपाल शर्मा, लुधियाना
नगर निगम चुनाव को लेकर जैसे जैसे सरगर्मियां तेज होती दिख रही हैं, वैसे वैसे आम आदमी पार्टी के विधायकों के इम्तिहान की घड़ी भी नजदीक आती दिखाई दे रही है। हर एक विधानसभा में आम आदमी पार्टी के विधायक की ओर से अपने कईं चहेतों को कौंसलर टिकट दिलाने का वायदा किया हुआ है। लेकिन ये भी साफ है कि आम आदमी पार्टी में विधायक के कहने पर सौ फीसदी टिकटें नहीं दी जानी हैं और इसमें आम आदमी पार्टी की जिला कमेटी की भूमिका अहम रहने वाली है। अब एक तरफ जहां आम आदमी पार्टी विधायकों के करीबी इस टिकट के दावेदार हैं तो दूसरी ओर जिला आम आदमी पार्टी की ओर से अपने वालिंटियर को टिकट के लिए आगे किया जा रहा है। आप में कौंसलर उम्मीदचार के चयन के लिए एक पैनल के तहत नाम हाईकमान के पास पहुूंचने हैं। इसके बाद इन नामों की योग्यता और पार्टी के लिए उनके किये कामों के लिहाज से व उसकी ग्राउंड रिपोर्ट लेकर इन नामों की स्क्रूटनिंग की जानी है और इसके बाद ही फाइनल नाम हाईकमान तक पहुंचने हैं। लेकिन यहां भी अंत में हाईकमान के पास ये अधिकार रहेगा कि वे अंतिम क्षण में किसी भी उम्मीदवार का नाम बदल सकती हैं। कईं विधायकों ने अपनी वर्किंग साथ ही अपने कोठी में आने वाले अपने चहेतों को कौंसलर टिकट की थापी दे डाली थी, तब ये भी ध्यान नहीं दिया गया कि एक ही वार्ड से ऐसे आधा दर्जन से अधिक टिकट दावेदार हो गए हैं। यही कारण है कि अब जब एक नाम फाइनल करने की बारी आ रही है तो विधायकों पर अंगुली उठने लगी है और विरोधता के सुर तेज हो रहे हैं। तीन दिन पहले आम आदमी पार्टी की ओर से लुधियाना में कुछ विधानसभा में ब्लॉक प्रधानों के नामों का एलान किया गया है, लेकिन इन नामों में अधिकतर वे नाम हटा दिए गए, जिनमें विधायक अपना इंट्रेस्ट रखते थे। खासकर लुधियाना वेस्ट व लुधियाना नार्थ में पुराने वॉलिटियर्स को ब्लॉक प्रधान के तौर पर तरजीह दी गई है और विधायकों के साथ दूसरी पार्टी से आए नामों को किनारे कर दिया गया है। एक विधायक ने तो अपने पुराने साथी व एक्स कौंसलर जो कि विदेश में सैटल हो गया था ,को टिकट दिलाने के नाम पर लुधियाना में बुला लिया है।
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कौंसलर उम्मीदवार लगा चुके हैं बहुत कुछ दांव पर
साल 2022 में आम आदमी पार्टी के विधायकों की जीत के बाद से ही कौंसलर चुनाव की भी दौड़ शुरु हो गई थी और आप सरकार बनने के तुरंत बाद ही कौंसलर टिकट के दावेदारों में भी रेस शुरु हो गई थी। बात करें लुधियाना शहर की तो यहां पर 90 फीसदी विधायक कांग्रेस या शिअद छोड़ कर आम आदमी पार्टी से चुनाव जीत कर विधायक बने हैं। यही कारण है कि ऐसे विधायकों के अधिकतर नजदीकी भी कांग्रेस व शिअद से संबंधित हैं। यही कारण है कि इन विधायकों की पोटली में किसी आप वालिंटियर के नाम की बजाय दूसरी पार्टी से आए अपने चहेतों के नाम ही डाले गए हैं। ऐसे में बहुत से चहेतें ऐसे हैं, जिन्हें विधायक ने एक से डेढ़ साल पहले कौंसलर टिकट दिलाने की थापी दे रखी है और इसी चक्कर में वे अपना बहुत कुछ दांव पर लगा चुके हैं। दांव से भाव है कि वे अपने तिजाेरी से धन, अपना टाइम, अपना मन तक कौंसलर चुनाव जीतने में लगा चुके हैं। इलाका विधायक को भी इस चुनाव में तभी फिल गुड होगा, जब उनके चहेतें उम्मीदवार को टिकट मिलती है।
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लुधियाना की चार विधानसभा में लगाए गए 19 ब्लॉक प्रधान
लुधियाना में तीन दिन पहले आम आदमी पार्टी ने कुल चार विधानसभा में 19 ब्लॉक प्रधान नियुक्त किए हैं। जिनमें 7 नार्थ में, 5 साउथ में और 6 वेस्ट विधानसभा से संबंधित हैं। हम ये भी कह सकते हैं कि ये ब्लॉक प्रधान जिले की कारगुजारी को तो बेहतर बनाएंगे ही इसके साथ साथ इलाका विधायक की कारगुजारी पर भी अपनी रिपोर्ट पार्टी को देंगे। बताया जाता है कि वेस्ट व नार्थ में लगाए गए अधिकतर ब्लॉक प्रधान अधिकतर पुराने वालिंटियर्स है और जिन नामों पर इलाका विधायक की थापी थी वे नाम लिस्ट से बाहर कर दिए गए हैं। कौंसलर चुनाव से ठीक पहले जारी हुई इस नई नियुक्ति ने विधायकों को भी अंदर खाते हिलाकर रख दिया है, वे भी अब अपने चहेतों को कहने लगे हैं कि उनकी कोशिश पूरी रहेगी, लेकिन नाम पार्टी ने ही तय करना है।
It-Will-Be-A-Big-Challenge-For-The-Aap-Mlas-To-Get-Their-Loved-Ones-Consular-Tickets-Know-Why