यशपाल शर्मा, लुधियाना मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की दाखा विधानसभा में दो रोड शो और कांग्रेसी नेताओं की जोर अजमाईश भी कांग्रेसी उम्मीदवार कैप्टन संदीप संधू की चुनावी भंवर में फंसी नैया को पार नहीं लगा सकी। बात करे दाखा विधानसभा के जमीनी समीकरणों की तो कई पेहलू ऐसे थे, जिस ने जीत का फतवा शिअद उम्मीदवार मनप्रीत सिंह अयाली के हक में दिया। साल 2017 के विधानसभा चुनाव जिसमें काफी हद तक आम आदमी पार्टी की हवा सब पर भारी दिखाई रही , तब भी मनप्रीत सिंह अयाली आप उम्मीदवार एचएस फुल्का से मात्र 4169 वोटों से हारे थे। इस चुनाव में भी अयाली की ओर से दाखा विधानसभा में करवाई डेवलपमेंट एचएस फुलका की जीत में सबसे बड़ा अडंगा बनी थी। जीत के बाद आप विधायक एचएस फुल्का का दाखा विधानसभा को छोड़ कर भागने ने यहां के लोगों को बड़ी चोट दी और इसका सीधा फायदा जहां अयाली को मिला, वहीं इसका सीधा नुकसान कैप्टन संदीप संधू को इस चुनाव में उठाना पड़ा। दाखा के लोगों में कहीं न कहीं फुलका का एक ऐसा उदाहरण दिल में था कि कहीं कैप्टन संदीप संधू भी चुनाव जीतने के बाद उन्हें मझधार में छोड़ चंडीगढ़ न बैठ जाएं। यही कारण है कि 2017 विधानसभा चुनाव में पहले नंबर पर आने वाली आम आदमी पार्टी का उम्मीदवार इस चुनाव में चौथे नंबर पर लुढक कर रह गया। कैप्टन संदीप संधू को साल 2017 में कांग्रेसी उम्मीदवार मेजर सिंह भैणी के मुकाबले अधिक वोट तो मिली, लेकिन वे आप के हक में गए वोट शेयर को कांग्रेस में कंवर्ट नहीं कर पाए। वहीं अयाली की ओर से साल 2012 से 2017 में करवाए डेवलपमेंट वर्क ने इस बार जीत में बड़ा उदाहरण रही। भैणी को जहां 2017 के चुनाव में 28571 वोट पडे़ थे, वहीं संदीप संधू को इस बार 51610 वोट मिले, लेकिन वहीं अयाली को साल 2017 में पडे़ 54754 वोट के मुकाबले इस बार 66286 वोट मिले। -बिगडे़ चुनावी माहौल ने भी पहुंचाया अयाली को फायदा इसमें कोई शक नहीं कि दाखा विधानसभा इस बार पंजाब की सभी चार सीटाें में टक्कर में सबसे हॉट सीट रही। यही कारण है कि इस सीट पर कब्जा करने को कांग्रेस व अकाली दल के आला नेताओं ने एडी चोटी का जोर लगाए रखा था। जहां उक्त सीट पर खुद मुख्यमंत्री दो बार रोड शो करने पहुंचे, वहीं शिअद से सुखबीर व मजीठिया ने भी यहां डेरा लगाए रखा। लेकिन इसी बीच दोनों पार्टी नेताओं के आरोप प्रत्यारोपों के बीच बिगडे़ माहौल ने भी काफी हद तक अयाली को अहम फायदा सोशल मीडिया से भी पहुंचा। विपक्ष में रहते मनप्रीत अयाली ने सोशल मीडिया का पूरा इस्तेमाल अपने चुनाव हथकंडो में किया, जबकि इस मामले में कांग्रेसी उम्मीदवार संधू पूरी तरह से चूक गए। यही कारण है कि कांग्रेस की हर हरकत चाहे वो कैप्टन संधू के आफिस के बाहर झगड़ा हुआ हो या विधायक जीरा का दाखा विधानसभा में वायरल हुआ एपिसोड़ हो। इसके साथ साथ कांग्रेस की सरकार में उक्त सीट पर तैनात एसएचओ का तबादला और फिर एसएसपी की जगह डीआईजी को कमान दिया जाना भी कांग्रेसी उम्मीदवार को कहीं न कहीं कमजाेर करता दिखा।
DAKHA VIDHANSABHA REVIEW