किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच कृषि मांगों पर सहमति न बनने के बाद सरकार और किसानों के बीच टकराव की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। मंगलवार को किसानों ने सुबह 10:30 बजे दिल्ली के लिए कूच किया था, लेकिन हरियाणा पुलिस ने शंभू व खनोरी बॉर्डर पर सुबह करीब 11:00 बजे उन्हें रोक लिया। इसके बाद लगातार इन बॉर्डर पर लाठी चार्ज, आंसू गैस के गोले छोड़ने और वॉटर कैनल से पानी की बौछार का सिलसिला चलता रहा। इस टकराव में किसान केवल पुलिस की ओर से बनाई गई सिक्स लेयर सुरक्षा में से केवल दो लेयर ही भेद पाए। इस पूरे घटनाक्रम में 100 से ज्यादा किसान घायल हो गए और दो दर्जन के करीब पुलिस कर्मचारी भी इस दौरान घायल हुए हैं। किसानों की ओर से हरियाणा बॉर्डर के पास ही मोर्चा लगा लिया गया है । उनका कहना है कि वह अब बुधवार को फिर से दिल्ली जाने को दोबारा से बॉर्डर पर करेंगे। वहीं बुधवार को एसकेएम के किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा की केंद्र पंजाब के किसानों की बात सुने, वरना हमसे न यह किसान दूर है और ना ही दिल्ली। बड़ी बात है कि यह किसान सभी फसलों पर एमएसपी और कई अन्य तरह की मांगे केंद्र सरकार से मनवाना चाहते हैं लेकिन केंद्र सरकार किसी भी दबाव में आकर इन्हें मानने को तैयार नहीं है। केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने साफ किया की, कि दो दौर की चर्चा में कई मांगों पर सहमति बनी है, बातचीत अभी जारी है। एमएसपी कानून जल्दबाजी में नहीं लाया जा सकता।
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