चंडीगढ़। चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर सबको चौंका दिया है। पार्टी ने आम आदमी पार्टी (AAP) के 3 पार्षदों गुरचरण सिंह काला, पूनम और नेहा को तोड़ लिया। सबकुछ फाइनल होने के बाद BJP ने 30 जनवरी को विवाद के बीच मेयर चुने गए अपने पार्षद मनोज सोनकर से इस्तीफा दिलवा दिया। पार्टी के इस कदम के साथ ही तय हो गया कि चंडीगढ़ नगर निगम में अब मेयर का चुनाव दोबारा होगा। इसके लिए AAP पार्षदों को तोड़कर BJP अपने बूते बहुमत का इंतजाम कर चुकी है। यह सबकुछ सुप्रीम कोर्ट से मिली 13 दिन की मोहलत में किया गया। 30 जनवरी को BJP के मनोज सोनकर के मेयर बनने के बाद I.N.D.I.A. अलायंस के कैंडिडेट कुलदीप कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका पर 5 फरवरी को सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ने मेयर चुनाव में रिटर्निंग अफसर रहे अनिल मसीह को लेकर कई सख्त टिप्पणियां की थी। साथ ही मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को तय करते हुए अनिल मसीह को व्यक्तिगत तौर पर कोर्ट में हाजिर रहने के निर्देश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए BJP ने तुरंत B प्लान पर काम शुरू कर दिया। 5 फरवरी से 19 फरवरी के बीच मिले 13 दिनों में पार्टी ने आम आदमी पार्टी के पार्षदों को तोड़ने का काम किया और जब सबकुछ फिक्स हो गया तो 18 फरवरी की रात को अपने मेयर मनोज सोनकर से इस्तीफा दिलवा दिया। BJP ने अपने इस प्लान की विपक्ष में बैठी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को भनक तक नहीं लगने दी। इन दोनों पार्टियों के नेता भाजपा पर धक्केशाही के आरोप लगाते हुए नगर निगम के सामने प्रदर्शन करते रह गए और BJP नेताओं ने मेयर पद पर कब्जा बरकरार रखने की पटकथा लिख डाली।
सबसे पहले चंडीगढ़ नगर निगम में दलों की स्थिति जानिए
चंडीगढ़ नगर निगम में कुल 35 सीटें (पार्षद) हैं। यहां एक वोट लोकल सांसद का रहता है। मेयर बनाने के लिए कम से कम 18 वोटों की जरूरत पड़ती है। 30 जनवरी तक नगर निगम में भाजपा के 14, आम आदमी पार्टी के 13, कांग्रेस के 7 और शिरोमणि अकाली दल का 1 पार्षद था। AAP के तीन पार्षदों के भाजपा जॉइन करने के बाद उसके पार्षदों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। एक वोट सांसद किरण खेर का है और 1 वोट अकाली दल के पार्षद का। इस तरह से BJP के पास अब नगर निगम में 19 वोट हो चुके हैं। दूसरी तरफ AAP के पार्षदों की संख्या 13 से घटकर 10 रह गई है। कांग्रेस के 7 पार्षदों को मिला भी लें तो I.N.D.I.A. अलायंस के पास सिर्फ 17 पार्षद होते हैं। यानि भाजपा से 2 वोट कम।
पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
चंडीगढ़ नगर निगम में 30 जनवरी को मेयर का चुनाव हुआ था जिसमें भाजपा के मनोज सोनकर के सामने I.N.D.I.A. अलायंस ने कुलदीप कुमार को कैंडिडेट बनाया। 30 जनवरी को मतदान के बाद रिटर्निंग अफसर और भाजपा के मनोनीत पार्षद अनिल मसीह ने I.N.D.I.A. अलायंस के 8 वोट इनवैलिड करार दे दिए जिससे भाजपा के मनोज सोनकर चुनाव जीत गए। I.N.D.I.A. अलायंस के कैंडिडेट कुलदीप कुमार ने इसे गलत ठहराते हुए 30 जनवरी को ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। इस पर हाईकोर्ट ने 31 जनवरी को सुनवाई की और विपक्ष को कोई राहत नहीं देते हुए 26 फरवरी अगली सुनवाई तय कर दी। इसके बाद I.N.D.I.A. अलायंस के कैंडिडेट कुलदीप कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन फाइल की। इस पर 5 फरवरी को सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस की बैंच ने रिटर्निंग अफसर अनिल मसीह को लेकर कई कड़े सवाल किए।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद B प्लान एक्टिव
सुप्रीम कोर्ट ने काउंटिंग से पहले वोटों पर साइन करते और उन पर टिक लगाते अनिल मसीह के वीडियो देखने के बाद जो टिप्पणियां कीं, उसके बाद भाजपा में हलचल शुरू हो गई। विपक्ष के हमलों के बीच BJP नेतृत्व ने चंडीगढ़ भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद को B प्लान पर काम करने का जिम्मा सौंपा। इसमें सूद को कांग्रेस और AAP के नाराज पार्षदों से संपर्क करने का टास्क दिया गया।
Bjps-B-Plan-To-Win-Chandigarh-Mayor-Election-3-Aap-Councilors-Demoted-Within-13-Days-Of-Meeting-With-Supreme-Court-Opponents-Kept-Protesting