कट्टर ईमानदार पार्टी यानी आम आदमी पार्टी की साख खतरे में पड़ती दिखाई दे रही है। कारण है दिल्ली शराब घोटाला जिसमें ईडी की ओर से दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को इस पूरे घोटाले का किंगपिन बताया जा रहा है। आम आदमी पार्टी एक ऐसी पार्टी है जिसका भूतकाल में कोई लंबा चौड़ा इतिहास नहीं है, लेकिन इस पार्टी ने खुद को आम आदमी की पार्टी बता लोगों के दिलों में जगह बनाई। दिल्ली पर कब्जा करने में बहुत सी राजनीतिक पार्टियों का 50 साल से पुराना राजनैतिक गुजर गया, लेकिन वे दिल्ली पर राज नहीं कर पाए। लेकिन आम आदमी पार्टी ने मात्र एक साल के भीतर दिल्ली विधानसभा पर कब्जा किया। इसके साथ ही देश की राजधानी दिल्ली में रिकॉर्ड तोड़ विधानसभा जीतकर अपनी सरकार बनाई। आम आदमी पार्टी के छोटे से इतिहास में सबसे बड़ा दावा ईमानदार कट्टर पार्टी का है और इसके नेता भी खुद को कट्टर ईमानदार बताते आ रहे हैं। दिल्ली में सरकार बनने के बाद आम आदमी पार्टी की ओर से मोहल्ला क्लीनिक और सरकारी स्कूलों में बेस्ट एजुकेशन और सस्ती बिजली सेवा देकर बड़े वोट बैंक पर कब्जा किया गया और यही पॉलिसी आम आदमी पार्टी की ओर से पंजाब में भी अपनाई गई । लोगों को हर महीने 300 यूनिट बिजली फ्री देकर एक बड़े तबके की वोट पर कब्जा किया गया। इसके साथ-साथ लोगों के दिलों में जगह बनाने के लिए शहीदों को भी खूब याद किया गया और अपने हर बड़े काज की शुरुआत शहीदों के गांव से कर लोगों के दिलों में जगह बनाने की कोशिश की गई। दिल्ली शराब घोटाले में दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया, राज्य सभा सांसद संजय सिंह सहित 13 अन्य लोग पहले से जेल में है। आम आदमी पार्टी के नेता जिनमें खुद दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल भी इस घोटाले को पूरी तरह से राजनीतिक बताकर खुद को पाक साफ साबित कर रहे है। लेकिन कागजी हकीकत कुछ और ही दिखाई दे रही है। पहले जानिए दिल्ली की नई शराब नीति क्या थी? 17 नवंबर 2021 को दिल्ली सरकार ने राज्य में नई शराब नीति लागू की। इसके तहत राजधानी में 32 जोन बनाए गए और हर जोन में ज्यादा से ज्यादा 27 दुकानें खुलनी थीं। इस तरह से कुल मिलाकर 849 दुकानें खुलनी थीं। नई शराब नीति में दिल्ली की सभी शराब की दुकानों को प्राइवेट कर दिया गया। इसके पहले दिल्ली में शराब की 60 प्रतिशत दुकानें सरकारी और 40 प्रतिशत प्राइवेट थीं। नई नीति लागू होने के बाद 100 प्रतिशत प्राइवेट हो गईं। सरकार ने तर्क दिया था कि इससे 3,500 करोड़ रुपये का फायदा होगा। सरकार ने लाइसेंस की फीस भी कई गुना बढ़ा दी। जिस एल-1 लाइसेंस के लिए पहले ठेकेदारों को 25 लाख देना पड़ता था, नई शराब नीति लागू होने के बाद उसके लिए ठेकेदारों को पांच करोड़ रुपये चुकाने पड़े। इसी तरह अन्य कैटेगिरी में भी लाइसेंस की फीस में काफी बढ़ोतरी हुई। घोटाले के आरोप क्यों लगे? नई शराब नीति से जनता और सरकार दोनों को नुकसान होने का आरोप है। वहीं, बड़े शराब कारोबारियों को फायदा होने की बात कही जा रही है। भारतीय जनता पार्टी का यही आरोप है। तीन तरह से घोटाले की बात सामने आ रही है। -------------------- लाइसेंस फीस में भारी इजाफा करके बड़े कारोबारियों को लाभ पहुंचाने का आरोप शराब ब्रिकी के लिए ठेकेदारों को लाइसेंस लेना पड़ता है। इसके लिए सरकार ने लाइसेंस शुल्क तय किया है। सरकार ने कई तरह की कैटेगिरी बनाई है। इसके तहत शराब, बीयर, विदेशी शराब आदि को बेचने के लिए लाइसेंस दिया जाता है। अब उदाहरण के लिए पहले जिस लाइसेंस के लिए ठेकेदार को 25 लाख रुपये का भुगतान करना पड़ता था, नई शराब नीति लागू होने के बाद उसी के लिए पांच करोड़ रुपये देने पड़े। आरोप है कि दिल्ली सरकार ने जानबूझकर बड़े शराब कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए लाइसेंस शुल्क बढ़ाया। इससे छोटे ठेकेदारों की दुकानें बंद हो गईं और बाजार में केवल बड़े शराब माफियाओं को लाइसेंस मिला। विपक्ष का आरोप ये भी है कि इसके एवज में आप के नेताओं और अफसरों को शराब माफियाओं ने मोटी रकम घूस के तौर पर दी। ------------------ सरकार बता रही फायदे का सौदा: सरकार का तर्क है कि लाइसेंस फीस बढ़ाने से सरकार को एकमुश्त राजस्व की कमाई हुई। इससे सरकार ने जो उत्पाद शुल्क और वैट घटाया उसकी भरपाई हो गई। खुदरा बिक्री में सरकारी राजस्व में भारी कमी होने का आरोप दूसरा आरोप शराब की बिक्री को लेकर है। उदाहरण के लिए मान लीजिए पहले अगर 750 एमएल की एक शराब की बोतल 530 रुपये में मिलती थी। तब इस एक बोतल पर रिटेल कारोबारी को 33.35 रुपये का मुनाफा होता था, जबकि 223.89 रुपये उत्पाद कर और 106 रुपये वैट के रूप में सरकार को मिलता था। मतलब एक बोतल पर सरकार को 329.89 रुपये का फायदा मिलता था। नई शराब नीति से सरकार के इसी मुनाफे में खेल होने दावा किया जा रहा है। दावा है कि नई शराब नीति में वही 750 एमएल वाली शराब की बोतल का दाम 530 रुपये से बढ़कर 560 रुपये हो गई। इसके अलावा रिटेल कारोबारी का मुनाफा भी 33.35 रुपये से बढ़कर सीधे 363.27 रुपये पहुंच गया। मतलब रिटेल कारोबारियों का फायदा 10 गुना से भी ज्यादा बढ़ गया। वहीं, सरकार को मिलने वाला 329.89 रुपये का फायदा घटकर तीन रुपये 78 पैसे रह गया। इसमें 1.88 रुपये उत्पाद शुल्क और 1.90 रुपये वैट शामिल है। घोटाले की जांच कैसे शुरू हुई? इस शराब नीति के कार्यान्वयन में कथित अनियमितता की शिकायतें आईं जिसके बाद उपराज्यपाल ने सीबीआई जांच की सिफारिश की। इसके साथ ही दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 सवालों के घेरे में आ गई। हालांकि, नई शराब नीति को बाद में इसे बनाने और इसके कार्यान्वयन में अनियमितताओं के आरोपों के बीच रद्द कर दिया गया था। सीबीआई ने अगस्त 2022 में इस मामले में 15 आरोपियों के खिलाफ नियमों के कथित उल्लंघन और नई शराब नीति में प्रक्रियागत गड़बड़ी के आरोप में एफआईआर दर्ज की। बाद में सीबीआई द्वारा दर्ज मामले के संबंध में ईडी ने पीएमएलए के तहत मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले की जांच शुरू कर दी। ईडी और सीबीआई दिल्ली सरकार की नई शराब नीति में कथित घोटाले की अलग-अलग जांच कर रही हैं। ईडी नीति को बनाने और लागू करने में धन शोधन के आरोपों की जांच कर रही है। वहीं, सीबीआई की जांच नीति बनाते समय हुई कथित अनियमितताओं पर केंद्रित है। शराब नीति घोटाले मामले में ईडी इससे पहले अब तक 15 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी थी और आज अरविंद केजरीवाल के घर पर पहले छापेमारी फिर तलाशी और बाद में गिरफ्तारी की। 1: विजय नायर 2: अभिषेक बोइनपल्ली 3: समीर महेंद्रू 4: पी सरथ चंद्रा 5: बिनोय बाबू 6: अमित अरोड़ा 7: गौतम मल्होत्रा 8: राघव मंगुटा 9: राजेश जोशी 10: अमन ढाल 11: अरूण पिल्लई 12: मनीष सिसोदिया 13: दिनेश अरोड़ा 14: संजय सिंह 15: के. कविता. अब इसी जांच के दायरे में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को भी गिरफ्तार किया जा चुका है और उन्हें 6 दिन के ईडी रिमांड पर ले लिया गया है। ऑफिस घोटाले में अरविंद केजरीवाल सहित आम आदमी पार्टी भी कानून के निशाने पर है और अगर इस मामले में पकड़े गए आरोपियों में से कोई सरकारी गवाह बन जाते हैं तो अरविंद केजरीवाल सहित आम आदमी पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती है।
The-Reputation-Of-A-Staunchly-Honest-Party-Is-In-Danger-In-The-Delhi-Liquor-Scam