यशपाल शर्मा, लुधियाना
भारतीय जनता पार्टी हाईकमान की ओर से कांग्रेस के सांसद रवनीत सिंह बिटटू को पार्टी में शामिल करने के बाद लुधियाना लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद इसका दबी जुबान में विरोध करने वाले लोकल नेताओं के तेवर ठंडे़ पड़ गए हैं और उन्हें पार्टी हाईकमान की ओर से नया चैलेंज थमा दिया गया है। असल में कल सांसद रवनीत सिंह बिटटू का लुधियाना में रोड़ शो है और सुबह साढे़ दस बजे रखबाग के नजदीक शुरु होनी है और दुर्गा माता मंदिर , विश्वकर्मा चौक से गिल रोड़ होते माडल टाउन एक्सटेंशन से निकल भाजपा मुख्यालय में संपन्न होनी हैं। पार्टी के आला नेताओं को अब इस रोड़ शो में अधिक से अधिक पब्लिक व वर्कर जुटाने का चैलेंज थमा दिया गया है और इसका नतीजा है कि पार्टी का हर छोटा बड़ा नेता अपने व्हटसएप व सोशल मीड़िया के जरिए पब्लिक को मैसेज भेजकर इस रोड़ शो में शामिल होने निमंत्रण भेज रहे हैं। ये मैसेज इतनी तादाद में जा रहे हैं कि दूसरी पार्टी के नेताओं व वर्करों के मोबाइल में भी ये धड़ाधड़ पहुंच रहे हैं और वे इस मैसेज के रिप्लाई में पूछ रहे हैं कि क्या वे भी इस रोड़ शो में आ सकते हैं।
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दबी जुबान में विरोध वाले तेवर पडे़ ठंडे़
सांसद रवनीत सिंह बिटटू को टिकट मिलने से पहले कोई कयास लगा रहा था कि परमिंदर बराड़ को टिकट मिलेगी तो कोई प्रवीण बांसल, कोई जीवन गुप्ता, कोई जतिंदर मित्तल, कोई रजनीश धीमान, कोई गुरदेव शर्मा देबी तो कोई एडवोकेट बिक्रम सिद्धू के नाम पर इस टिकट की मोहर लगा रहा था। लेकिन जब रवनीत बिटटू भाजपा में शामिल हुए तो भी इन नेताओं ने ये उम्मीद नहीं छोड़ी की पार्टी उन्हें टिकट दे सकती है और रवनीत बिटटू को किसी अन्य जगह से चुनाव लड़वा सकती है। लेकिन जब बिटटू के नाम पर मोहर लग गई तो अंदरखाते दबी जुबान में इसका विरोध भी इन नेताओं ने शुरू किया। लेकिन हाईकमान के फैसले पर अंगुली उठाने किसी भी भाजपा नेता के कैरियर को चौपट कर सकता है और यही कारण है कि ये विरोध दब गया।
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इस तरह समझिये हाईकमान का गणित
अगर पार्टी हाईकमान के गणित को समझे तो वे अपनी पार्टी के किसी भी हिंदू नेता को टिकट देकर लुधियाना में हिंदू वोटरों से तो बड़ी तादाद में वोट हासिल कर लेते, लेकिन शहरी सिख व गांवों से सिख वाेट लेना पार्टी के किसी भी नेता के लिए संभव नहीं था और ऐसे में उसकी जीत पर सवाल खड़ा होना स्वाभिक ही था। लेकिन रवनीत सिंह बिटटू को शहर की भाजपा कैडर की हिंदू वोट के साथ साथ सिख वोट भी पड़नी तय है। इसके साथ साथ वे दस साल से सांसद के तौर पर खुद भी गांवों में अच्छी पहचान रखते हैं और इस चुनाव में अगर वे अपनी पहचान से गांवों की 15 से 20 फीसदी वोट भी हासिल कर गए तो उनकी जीत बेहद आसान हो जाएगी। लेकिन वहीं अगर कांग्रेस व आप में समझौता हो जाता है तो ये समीकरण कुछ अलग हो जाएंगे।
Bjp-Hushed-Opposition-To-Giving-Ticket-To-Ravneet-Bittu-Cooled-Down