शिरोमणी अकाली दल को आज इस संसदीय क्षेत्र में उस समय मजबूती मिली जब पूर्व मंत्री और वरिष्ट अकाली नेता जगदीश सिंह गरचा , पार्टी अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल की उपस्थिति में अपने परिवार और समर्थकों के साथ पार्टी में शामिल हुए। गरचा परिवार और उनके समर्थकों का पार्टी में स्वागत करते हुए अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि सरदार गरचा, पूर्व मुख्यमंत्री सरदार परकाश सिंह बादल के बहुत करीबी सहयोगी थे और हर अच्छे और बुरे समय में उनके साथ खड़े रहे। उन्होन कहा,‘‘ मुझे खुशी है कि अकाली परिवार, जो कुछ कारणों से पार्टी से अलग हो गया था, सभी पंथक ताकतों से अकाली दल के बैनर तले एकजुट होने की मेरी अपील के बाद फिर से अकाली दल में शामिल हो गया है।’’
इस बात पर जोर देते हुए कि अकाली दल पंजाबियों की आकांक्षाओं का सबसे अच्छा प्रतिनिधित्व करता है, सरदार बादल ने कहा,‘‘ राष्ट्रीय पार्टियां पंजाब को ईस्ट इंडिया कंपनी के एक प्रांत के रूप में देखते हैं और राज्य के लोगों का दिल जीतने की कोशिश करने के बजाय इसे अपने में मिलाना चाहते हैं।’’ यह कहते हुए कि शिरोमणी अकाली दल हमेशा पंजाब के लिए खड़ा रहा है , सरदार बादल ने कहा,‘‘ हमारे लिए पंजाब और पंजाबियों के हितों की रक्षा करना सर्वोपरि है। हम राष्ट्रीय पार्टियों के विपरीत पंजाब के मुल मुददों पर कभी समझौता नही कर सकते।’’
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए सरदार बादल ने कहा कि आप सरकार ने केंद्र सरकार के आदेश पर राज्य के कई जिलों को अधिसूचित करने और सरकारी खरीद प्रणाली का निजीकरण करने का फैसला कर लिया जाएगा और इसीलिए वह सभी मुददों पर केदं्र के अनुसार ही चल रहे हैं।’’ उन्होने यह भी कहा कि पंजाब में आप सरकार ने भी दिल्ली शराब घोटाले की तर्ज पर शराब घोटाला किया है। उन्होने कहा,‘‘ पंजाब की आबकारी नीति दिल्ली की नीति के अनुरूप बनाई गई है और यहां तक कि शराब के ठेके भी उन्ही लोगों को दिए गए हैं।’’
सरदार बादल ने कहा कि आप और कांग्रेस पंजाब में दिखावटी लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होने कहा कि ये दोनों पार्टियां केंद्र में गठबंधन कर रही हैं और भगवंत मान ने हाल ही में दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व के साथ मंच सांझा किया है। उन्होने कहा दोनों ही पार्टियां पंजाब में लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही हैं।’ शहर के दौरे के दौरान अकाली दल अध्यक्ष के साथ हीरा सिंह गाबड़िया, शरणजीत सिंह ढ़िल्लों, रंजीत सिंह ढ़िल्लों, भूपिंदर सिंह भिंदा, हरीश राय ढ़ांडा, कमल चेटली, गुरमीत कुलार, हरचरन सिंह गोहलवारिया और विपिन सूद भी मौजूद थे।
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