लोक इंसाफ पार्टी प्रमुख और पूर्व एमएलए सिमरजीत सिंह बैंस की अब किसी भी राजनीतिक पार्टी के साथ गठबंधन या शामिल होने की दौड़ ने उन्हें हास्य का पात्र बनाकर रख दिया है। सोशल मीडिया पर अब सिमरजीत सिंह बैस को लेकर अलग-अलग तरह की कमेंट देखने को मिल रहे हैं। बैंस को चाहने वाले रोज सोशल मीडिया पर राजनीति में बैंस का नया धमाका कहकर पोस्ट डाल रहे हैं, लेकिन किसी भी तरह का धमाका ना होने के चलते अजीब तरह की स्थिति बनती दिखाई दे रही है । कारण यह है कि सांसद रवनीत सिंह बिट्टू को भारतीय जनता पार्टी लुधियाना से अपना लोकसभा उम्मीदवार बन चुकी है और उनका भाजपा में जाने का दरवाजा बंद होने के बाद से वे कांग्रेस व आम आदमी पार्टी से गठबंधन या उसमें शामिल होने को दिल्ली के चक्कर काट रहे हैं। भाजपा में भी कुछ ऐसे नेता भी थे जो बैंस को भाजपा के साथ जोड़ अपना राजनीतिक उल्लू सीधा करना चाहते थे, लेकिन उनकी उम्मीदों पर भी पानी फिर गया। रोज रोज बैंस के नजदीकियों की ओर से यह भी हवा उड़ा दी जाती है कि बैंस ब्रदर्स अब कांग्रेस में शामिल होंगे या कोई नया धमाका कर सकते हैं, जैसी बातों के चलते भी उनका राजनीतिक मखौल बनकर रह गया है। सूत्र बताते हैं कि सिमरजीत सिंह बैंस पिछले दो दिन से दिल्ली में ही थे और वह पहले दिल्ली में राहुल गांधी से मिलने के प्रयास में थे लेकिन कामयाबी न मिलने के बाद वह दिल्ली के सीएम और आम आदमी पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल को दिल्ली मिलकर आए हैं और उनकी इस मुलाकात के तुरंत बाद फिर से सिमरजीत सिंह बैंस की ओर से धमाका करने की चर्चाएं शहर में फैल रही है, लेकिन पिछले 4 दिन से धमाका किए जाने की खबरें अब हास्य के पात्र बन रही है। कारण यह है कि अभी तक उन्हें किसी भी पार्टी ने पनाह नहीं दी है। भले ही सिमरजीत सिंह बैंस रविवार को आम आदमी पार्टी सुप्रीमो की पत्नी सुनीता केजरीवाल को मिलकर आए हैं लेकिन 4 साल पहले बैंस की और से ही आम आदमी पार्टी के साथ हुए गठबंधन को तोड़ा गया था और अब आम आदमी पार्टी की कोई मजबूरी नहीं कि वे बैंस ब्रदर्स की पार्टी के साथ दोबारा से गठबंधन करें । मौजूदा समय में सिमरजीत सिंह बैंस अपनी शर्तों पर किसी अन्य पार्टी के साथ गठबंधन कर लुधियाना लोकसभा का चुनाव लड़े यह उनके लिए संभव नहीं दिखाई दे रहा। जानकार मानते हैं कि ऐसी स्थिति में सिमरनजीत सिंह बैंस या तो लोक इंसाफ पार्टी से फिर से अपना भविष्य आजमा सकते हैं या फिर वह आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी के लिए 5 से 6 सीट मांग कर किसी अन्य पार्टी को अपना समर्थन दे सकते हैं।
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