लुधियाना से भाजपा के लोकसभा उम्मीदवार सरदार रवनीत सिंह बिटटू की सरकारी कोठी की एनओसी व इसके एवज में मांगे गए 1.83 करोड़ रुपए नगर निगम अफसराें के लिए बड़ी मुसीबत बनता दिख रहा है। इस विवाद से बचने को निगम के आला अफसरों ने खुद की जान बचाने को भले ही प्रॉपर्टी टैक्स के इंस्पेक्टर विवेक प्रभाकर व एक क्लर्क को सस्पेंड कर दिया है, लेकिन ये मामला यहीं पर थमने वाला नहीं। असल में इस पूरे विवाद में साल 2019 में रवनीत सिंह बिटटू को तत्कालीन लोकसभा चुनाव को दिया गया नॉन ओब्जेक्शन सर्टिफिकेट बड़ा पेच बन गया है। जहां नगर निगम ये दावा कर रहा है कि कागजों में ये कोठी सांसद रवनीत सिंह बिटटू को अलॉट नहीं की गई, तो साल 2019 के लोकसभा चुनाव में निगम ने इसकी एनओसी बिटटू को कैसे जारी कर दी। तब इस दौरान पंजाब में कांग्रेस की सरकार थी और ये संभव है कि किसी दबाव में आकर ये एनओसी जारी की गई हो। ऐसे में अगर साल 2019 में गलती से एनओसी जारी हुई तो इसके घेरे में निगम के तत्कालीन जोनल कमिश्नर, तहबाजारी ब्रांच के सुपरिटेंडेंट, इंस्पेक्टर व क्लर्क तक आने तय हैं। अगर ऐसा था तो साल 2022 के बाद पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद भी सांसद व निगम के बीच तालमेल कैसे बना रहा। इतना नहीं इस कोठी के रखरखाव को निगम ने अपने सफाई कर्मचारी, माली व अन्य स्टाफ तक मुहैया करवाया गया था। इतना ही इस सरकारी कोठी में होने वाली अन्य टूटफूट व सांसद की अन्य जरुरत मुताबिक फंड निगम से मुहैया करवाया जा रहा। इतना ही नहीं मौजूदा आम आदमी पार्टी के विधायक गुरप्रीत गोगी ने भी सांसद रवनीत सिंह बिटटू को दी गई सरकारी कोठी खाली करवाने का मुददा उठाया था। लेकिन इसके बावूद निगम ने कोई नोटिस सांसद बिटटू को नहीं दिया। ऐसे में इस पूरे प्रकरण में निगम कमिश्नर की ओर से केवल एक इंस्पेक्टर व क्लर्क को सस्पेंड करने तक में ये पूरा विवाद थमता नहीं दिखाई दे रहा। इस पूरे गोलमाल का ही नतीजा है कि जब रवनीत सिंह बिटटू ने अपना नामांकन भरने को इस कोठी की निगम से एनओसी मांगी तो इसमें 24 घंटे की बजाय कईं दिन लगा दिए गए और रात में व्हॉटसएप व ईमेल के जरिए बिटटू को करीब 1.83 करोड़ रुपए का बिल भेज दिया गया। यही कारण है कि बिटटू की ओर से इलेक्शन कमीशन को की गई इस मामले की शिकायत पर लोकल गर्वमेंट सेक्रेटरी को नोटिस भेज पूरी रिपोर्ट मांगी गई हैं। नोटिस के बाद शुरु हुई जांच से बचने को कईं अफसरों ने अपनी खाल बचाने को तुुरंत इंस्पेक्टर व क्लर्क को सस्पेंड कर दिया। वहीं निगम कमिश्नर संदीप ऋषि ने भी उक्त मामले में खानापूर्ति दिखाते हुए ये एनओसी जिसमें पहले जोनल कमिश्नर स्तर पर रिपोर्ट होती थी, को अपने लेबल पर तबदील कर दिया है और उक्त मामले में इंस्पेक्टर व क्लर्क को आठ घंटे के भीतर रिपोर्ट करने को कहा गया है। लेकिन निगम कमिश्नर की इस खानापूर्ति से साफ है कि इस मामले में कईं बडे़ अफसरों पर गाज गिरने से बचाया जा रहा है।
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आखिर आठ साल तक निगम क्यों रहा चुप
बड़ी बात है कि नगर नगम ने साल 2016 से लेकर अब तक इस सरकारी कोठी का पानी सीवरेज बिल क्यों नहीं लिया और क्यों सांसद पर मेहरबान बने रहे। ये अपने आप में नगर निगम अफसरों व स्टाफ की नालायकी व लापरवाही साबित कर रहा है। ऐसे में एकाएक सांसद को ब्याज सहित इस बिल की अदायगी को कहना अपने आप में कईं सवाल खड़े कर रहा है।
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सांसद बिटटू को कोठी देने का प्रस्ताव लाया गया था हाउस में
नगर निगम के अफसर जो ये कोठी सांसद रवनीत बिटटू को अलॉट न होने की बात कह रही है, कुछ साल पहले ही ये कोठी सांसद बिटटू को अलॉट करने का एक प्रस्ताव निगम में लाया गया था और तब इस प्रस्ताव को सहमति से पास भी कर दिया गया था। लेकिन कोठी उन्हें कितने साल के लिए अलॉट की गई, ये फिलहाल जांच का इश्यू है।
Ravneet-Bittu-Government-Kothi-Controversy-Mc-Is-Trying-To-Suppress-The-Entire-Controversy-By-Suspending-The-Inspector-And-Clerk